रविवार, 1 मई 2022

प्रसिद्धसाधर्म्यात् साध्यसाधनमुपमानम्। १.१.६ आप्तोपदेशः शब्दः। १.१.७

प्रसिद्धसाधर्म्यात् साध्यसाधनमुपमानम्। १.१.६
 
प्रसिद्ध वस्तु के जाने हुए समान धर्म से साध्य(जानने योग्य) वस्तु का ज्ञान कराने वाला साधन उपमान प्रमाण कहलाता है।

धर्म =जो भी द्रव्य में रहता है वह उसका धर्म कहलायेगा। गुण, कर्म, जाती
(इस दृष्टि से गुण - गुणी की तुलना में धर्म - धर्मी अधिक व्यापक है।)
सधर्म = समान धर्म
साधर्म्य = समान धर्म का होना 

जब कोई वस्तु के धर्म आप जानते हो और यह भी जानते हो की कोई अन्य वस्तु में इससे मिलते जुलते अमुक अमुक धर्म है (परन्तु उस अन्य वस्तु को नहीं जानते), उसके पश्चात अन्य वस्तु का प्रत्यक्ष करते समय उन जाने हुए समान धर्मों को वहां भी पा कर प्रत्यक्ष की जा रही वस्तु के साथ अन्य वस्तु का नाम जोडना यह उपमान प्रमाण का काम है।

जैसे आप को जंगल में जा कर मुद्गपर्णी और शालपर्णी (यह दो औषधीय पौधे है) लाने के लिए कहा गया। आप इन औषधियों को नहीं जानते पर आप को बताया  गया की इनके नाम इनके पर्ण मुंग और उडद (मुद्ग और शाल) के पत्तों के समान होने से है और आप मुंग और उडद के पौधों को पहचानते हो। तो अब जब जंगल में मुद्गपर्णी और शालपर्णी देखोगे तब उन के पत्तों को देखकर उन पौधों से उनका नाम जोड पाओगे (उनकी पहचान कर पाओगे)।

यहां आपका मुंग और उडद के पर्ण कैसे है यह जानना पहले का प्रत्यक्ष था (अब स्मृति में से आया था।)
आपका यह जानना की मुद्गपर्णी और शालपर्णी के पत्ते मुंग और उडद के पत्ते के समान होते है यह पहले का शब्द प्रमाण था (अब स्मृति में से आया था।)
मुद्गपर्णी और शालपर्णी का आप अभी प्रत्यक्ष कर रहे हो। 
उपमान प्रमाण यहां प्रत्यक्ष की जा रही वस्तु से उसका नाम जोडने का कार्य कर रहा है।

'जैसे यह वैसे वह' कहकर बोला जाता है वह उपमान प्रमाण है। अनुमान प्रमाण के पंचावयव में चतुर्थ अवयव उपनय उपमान प्रमाण सदृश्य है। (जैसे रसोई में धुआं आग के कारण था ऐसे ही पर्वत पर)


अब शब्द प्रमाण का सूत्र देखते है। 

आप्तोपदेशः शब्दः। १.१.७ 
आप्त पुरुष का कथन शब्द प्रमाण कहलाता है।

आप्त =वह पुरुष (=व्यक्ति) जिसने जिस पदार्थ का विषय है उसका साक्षात्कार किया है।
साक्षात्कार = जो वस्तु जैसी है उसको उसी रूप में निश्चयपूर्वक जानना।

ऐसा जानकार व्यक्ति (=पदार्थ का साक्षात्कृतधर्मा पुरुष = आप्त) जब उस विषय के बारे में अन्यों को बताने के लिए प्रवृत्त होता है तब उसका कथन शब्द प्रमाण कहलाता है। 

आप्ति शब्द आप् (आपॢँ व्याप्तौ) से बनता है जिसका अर्थ है पूर्ण जानकारी। उस आप्ति के साथ अपने कार्य में प्रवृत्त होने वाला पुरुष आप्त है। 

यह लक्षण उत्तम विद्वान, साधारण जन और अति सीमित ज्ञान रखने वालों पर एक सा लागू होगा। जिस जिस विषय में उनको यथार्थ जानकारी है उन उन विषय में वह आप्त बन सकते है।

जगत में अनेक व्यवहार इसी प्रमाण के आधार पर चलते है और मात्र मनुष्य ही नहीं, अन्य जीव भी (अन्य प्रमाणों के साथ साथ) इसका उपयोग करते है।