रविवार, 9 अक्टूबर 2022

निग्रहस्थान : प्रतिज्ञाहानि प्रतिज्ञान्तरं प्रतिज्ञाविरोध प्रतिज्ञासंन्यास हेत्वन्तर अर्थान्तर निरर्थक अविज्ञातार्थ

पाँचवें अध्याय के दूसरे आह्निक में अब हम सोलह पदार्थों में से अंतिम निग्रहस्थान देखेंगे। निग्रहस्थान वह स्थान है जहां पराजय होता है (जहां प्रतिपक्ष निग्रहस्थान में पहुँचने वाले पक्ष को अपनी पकड में ले लेता है।)

प्रथम अध्याय में हमने निग्रहस्थान का लक्षण देखा था।

विप्रतिपत्तिरप्रतिपत्तिश्च निग्रहस्थानम्। १.२.१९

(विप्रतिपत्ति) विरुद्धज्ञान से कथन कर देना (अनुचित/गलत/नियम विरुद्ध कथन करना) अथवा (अप्रतिपत्ति) अज्ञानता वश चुप रह जाना (बात को समझ न पाना/ समझा न पाना) निग्रहस्थान है।


निग्रहस्थानों के २२ विभाग है जो प्रथम सूत्र में कहें है।

प्रतिज्ञाहानिः प्रतिज्ञान्तरं प्रतिज्ञाविरोधः प्रतिज्ञासंन्यासो हेत्वन्तरमर्थान्तरं निरर्थकमविज्ञातार्थमपार्थकमप्राप्तकालं न्यूनमधिकं पुनरुक्तमननुभाषणमज्ञानमप्रतिभा विक्षेपो मतानुज्ञा पर्यनुयोज्योपेक्षणं निरनुयोज्यानुयोगोऽपसिद्धान्तो हेत्वाभासाश्च निग्रहस्थानानि। ५.२.१

प्रतिज्ञाहानि प्रतिज्ञान्तरं प्रतिज्ञाविरोध प्रतिज्ञासंन्यास हेत्वन्तर अर्थान्तर निरर्थक अविज्ञातार्थ अपार्थक अप्राप्तकाल  न्यून अधिक पुनरुक्त अननुभाषण अज्ञान अप्रतिभा विक्षेप मतानुज्ञा पर्यनुयोज्योपेक्षण निरनुयोज्यानुयोग अपसिद्धान्त  हेत्वाभास ये निग्रहस्थान है।


नीचे निग्रहस्थानों का अर्थ मात्र दिया है। वर्तमान उदाहरण, जहां मिल सकेंगे वहाँ हम सभी के अर्थ देखने के बाद देखेंगे।

प्रतिज्ञाहानि
प्रतिदृष्टान्तधर्माभ्यनुज्ञा स्वदृष्टान्ते प्रतिज्ञाहानिः। ५.२.२
स्वपक्ष में परपक्ष के (साध्य)धर्म का स्वीकार प्रतिज्ञाहानि नाम का निग्रहस्थान है।

प्रतिज्ञान्तर
प्रतिज्ञातार्थप्रतिषेधे धर्मविकल्पात्तदर्थनिर्देशः प्रतिज्ञान्तरम्। ५.२.३
प्रतिज्ञा के अर्थ के प्रतिषेध के उपरांत खंडित हुई प्रतिज्ञा में कोई विशेषण जोडकर अन्य अर्थ प्रस्तुत करना प्रतिज्ञान्तर निग्रहस्थान है।

प्रतिज्ञाविरोध
प्रतिज्ञाहेत्वोर्विरोधः प्रतिज्ञाविरोधः। ५.२.४
प्रतिज्ञा तथा हेतु का परस्पर विरोध होने से प्रतिज्ञाविरोध निग्रहस्थान बनता है।

प्रतिज्ञासंन्यास
पक्षप्रतिषेधे प्रतिज्ञातार्थापनयनं प्रतिज्ञासंन्यासः। ५.२.५
प्रतिज्ञा के प्रतिषेध के उपरांत खंडित हुई प्रतिज्ञा को छिपाना प्रतिज्ञासंन्यास है।

हेत्वन्तर
अविशेषोक्ते हेतौ प्रतिषिद्धे विशेषमिच्छतो हेत्वन्तरम्। ५.२.६
अविशेष हेतु के खंडित होने पर हेतु में विशेषण देने का प्रयत्न हेत्वन्तर निग्रहस्थान है।

अर्थान्तर
प्रकृतादर्थादप्रतिसम्बद्धार्थमर्थान्तरम्। ५.२.७
प्रकृत अर्थ की उपेक्षा कर के असंबद्ध अर्थ का कथन अर्थान्तर निग्रहस्थान है।

निरर्थक
वर्णक्रमनिर्देशवन्निरर्थकम्। ५.२.८
वर्णक्रम का उच्चारण जैसे कोई अर्थ को लिए हुए नहीं होता ऐसे निरर्थक प्रलाप करना निरर्थक निग्रहस्थान है।

अविज्ञातार्थ
परिषत्प्रतिवादिभ्यां त्रिरभिहितमप्यविज्ञातमविज्ञातार्थम्। ५.२.९
तीन बार बोलने पर भी यदि परिषद अथवा प्रतिवादी क्या कहा है न समझ पाए (उनको समझ या सके ऐसे स्पष्ट, प्रसिद्ध शब्दों में बोलने में तीन प्रयत्न पर भी असफल रहें) तब बोलने वाला अविज्ञातार्थ निग्रहस्थान में आता है। (अपनी बात कहने के लिए अप्रसिद्ध, क्लिष्ट अथवा अस्पष्ट शब्द जो किसी को समझ न आए का उपयोग bug है feature नहीं)