गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

End of iteration One

न्यायदर्शन के अध्ययन का यह प्रथम iteration यहीं समाप्त करती हूँ। बाकी बचे सूत्र में से अधिकांश वर्तमान अध्ययन हेतु अधिक प्रासंगिक नहीं है और कुछ जो किसी मात्रा में प्रासंगिक हो सकते है मात्र उनको लेने से पूर्वापर संबंध नहीं बनने से उनको लेना व्यर्थ होगा।

जैसे की मैंने प्रथम प्रयास के प्रारंभ में कहा था, यह न तो न्यायदर्शन सीखाने का प्रयास था न ही जो मैंने सिखा है उसे बताने का। मेरा उसे सीखने के प्रथम प्रयास को अंकित करना मात्र था।

एक वस्तु जो इस प्रथम iteration में होनी चाहिए थी पर नहीं हो पाई वह है अधिक स्थानों में वर्तमान व्यवहार जगत से उदाहरण। आशा है की यह अपूर्णता द्वितीय iteration में पूरी हो पाएगी।

मेरे अध्ययन की अनियमितता ने posts के समय की नियमितता और उनकी लंबाई दोनों को कभी कभी प्रभावित किया। इस अध्ययन यात्रा में एक ऐसे handle से जुडने के लिए जो न तो प्रसिद्ध है न तो किसी प्रसिद्ध handle ने recommend किया हुआ, आप single digit सहपाठियों का में धन्यवाद करती हूँ।

So, what next? Second iteration of Nyay which is spaced more regularly, has better sized posts plus has attempted enrichment in content? Yes, but not just that.

Lets start first iteration of Yogdarshan as well in parallel. Okay, not right away. Give me two three weeks.

क्या आप इस शास्त्राध्ययन में अपने उन मित्रों को जिनकी इसमें रुचि हो सकती है उन्हें भी जुडने के लिए आमंत्रित करेंगे?